आंटी का मदमस्त जिस्म
इन्हीं गर्म सेक्स कहानी को पढ़ कर मेरे मन में अपनी सेक्स कहानी लिखने की चाहत जागी.
मैं चाहता हूँ कि मेरी चाची की चूत चुदाई कहानी को आप सभी के साथ साझा करूं.
ये एक सच्ची घटना है. चूंकि मैं पहली बार सेक्स कहानी लिख रहा हूँ, इसलिए ये तो पक्का है कि मुझे गलती होगी. मगर आपसे इल्तजा है कि यदि आपको कोई ग़लती दिखे तो प्लीज़ नजरअंदाज कर दीजिएगा.
यह घटना आज से 2 साल पुरानी उस वक्त की है, जब मैं 12वीं क्लास में पढ़ता था.
मुझे अन्तर्वासना की सेक्स कहानियां पढ़ने से सेक्स के बारे में काफी कुछ पता चल चुका था.
अपनी कामपिपासा को शांत करने के लिए अन्तर्वासना साईट में दी गई सेक्स वीडियो को क्लिक करके देसी चुदाई की क्लिप्स भी देख लेता था.
उनकी मस्त चुदाई देख कर मैं अपने लंड को हिलाए बिना रह ही नहीं पाता था और मुठ मार कर खुद को शांत कर लेता था.
एक दिन मैं यूं ही अन्तर्वासना की साईट पर वीडियोस के लिए सर्च कर रहा था कि तभी एक सेक्स स्टोरी सामने आ गई.
मैं उस सेक्स कहानी में खो गया.
ये सेक्स कहानी मुझे बेहद पसंद आई और उसी दिन से मुझे सेक्स कहानी पढ़ना ज्यादा अच्छा लगने लगा.
अब मैं रोज सुबह से चाय आदि पीने के बाद अपने कमरे में आकर अन्तर्वासना की साईट को खोल कर अपनी रात भर की गर्मी को शांत करने के लिए लंड हिलाते हुए सोचता रहता था कि कोई चुत चोदने मिल जाए, तो मजा ही आ जाए.
इस सोच का नतीजा ये हुआ कि मेरी निगाहें अपने इर्द गिर्द रहने वाली लड़कियों और महिलाओं पर जाने लगीं.
फिर एक दिन हमारे घर मेरी चाची आईं, ये मेरी अम्मी की छोटी बहन भी थीं. उनका नाम रूही था. मेरी अम्मी की बहन का निकाह मेरे चचाजान से ही हुआ था. इसलिए रूही मेरी चाची भी थीं और खाला भी थीं.
मेरी चाची लातूर में रहती हैं. मेरी चाची के घर में 6 मेंबर हैं. चाची अंकल के साथ उनकी 3 बेटियां और एक बेटा रहते हैं.
रूही चाची दिखनी में बहुत सेक्सी हैं. उनका भरा हुआ बदन एकदम टाइट है. उनके मम्मे और गांड इतनी मस्त है कि जो भी चाची को एक बार देख ले, तो खुश हो जाए.
चाची हमारे घर कुछ दिनों के लिए रहने आई थीं, उनके साथ उनकी 2 बेटियां भी आई थीं.
वो संडे का दिन था इसीलिए स्कूल की छुट्टी थी. मैं घर पर ही था.
दोपहर को दरवाजे पर दस्तक हुई.
जब मैंने दरवाज़ा खोला, तो देखा सामने रूही चाची नकाब पहने खड़ी थीं.
मेरे दरवाजा खोलते ही उन्होंने अपने चांद से मुखड़े से नकाब हटाया, तो मैं उन्हें देख कर खुश हो गया और सलाम बोल कर उनको अन्दर आने के लिए कहा.
साथ ही मैंने आवाज देकर अम्मी को बताया कि रूही चाची आई हैं.
मेरी अम्मी भी जल्दी से आईं और दोनों बहनें गले लग कर मिलीं.
इसके बाद जब चाची ने अपना बुरका निकाला, तो मैं तो उन्हें बस देखता ही रह गया. क्या मस्त माल लग रही थीं.
इस पारदर्शी साड़ी में से उनकी गोरी कमर, सीने पर तने हुए बड़े बड़े बूब्स और चुस्त पेटीकोट से एकदम उठे हुए चूतड़ों को देख कर मेरे लंड में तो समझो फुरफुरी आ गई.
चाची मेरी अम्मी से बातें करने में लगी थीं. बुरका उतारते वक्त उनका ध्यान अपने कपड़ों और साड़ी के आंचल पर नहीं था. उनकी इस बेध्यानी में मैं अपनी कामुक निगाहों से उन्हें देखने लगा.
उनकी साड़ी सीने से ढलकी हुई थी और गहरे गले के ब्लाउज से उनके मिल्की वाइट दूध देख कर मुझे बहुत रोमांच हो रहा था.
मुझे लग रहा था कि शायद मेरे लंड के लिए चुत का इंतजाम हो गया है.
तभी चाची की नजर मुझे पर पड़ी और उन्होंने मुझसे भी बात करनी शुरू कर दी. तब तक अम्मी चाची के पानी लेने अन्दर चली गई थीं.
चाची ने मुझसे बातचीत शुरू तो की, मगर उन्होंने अपने ढलके हुए पल्लू को अपने सीने पर ठीक नहीं किया. जिससे मुझे उनके चूचों के दीदार बदस्तूर होते रहे.
शायद अब इस बात को चाची ने भी नोट कर लिया था, मगर इसके बावजूद भी उन्होंने खुद को व्यवस्थित करने की कोई चेष्टा नहीं की.
फिर अम्मी आ गईं और मैं चाची की बेटियों से बात करने लगा.
कुछ देर बाद दिन का खाना आदि हुआ और लगातार बातें हंसी मजाक आदि चलता रहा.
ऐसे ही दिन गुज़र गया और रात हो गई.
हम सबने साथ में खाना खाया.
खाने के बाद सब लोग सोने की तैयारी करने लगे.
मेरी अम्मी अब्बू अपने रूम में चले गए और मैं चाची को लेकर अपने कमरे में आ गया.
चाची सोने के लिए अपनी छोटी लड़की को लेकर मेरे रूम में आ गईं. बड़ी लड़की अम्मी अब्बू के कमरे में सोने चली गई.
मैं अपने कमरे में चाची के साथ पलंग पर लेट गया. हम दोनों एक साथ ही लेटे बात करने लगे और चाची की एक साइड उनकी छोटी लड़की लेट गई थी.
चाची थकी हुई थीं इस कारण थोड़ी देर में ही सो गईं.
मगर मुझे नींद नहीं आ रही थी.
कमरे की लाइट ऑन थी और मेरा फेस लाइट की तरफ था. मैंने करवट बदल ली, तो अब मेरा चेहरा और चाची का चेहरा आमने सामने ही गया था.
मेरी नज़रें उनके रसीले होंठों पर टिक गई थी.
क्या मस्त रसीले होंठ थे उनके, दिल तो कर रहा था कि बस आगे बढ़ कर इन रसभरे लबों चूस लूं.
मगर मजबूरी थी इसलिए मुझे अपने आप पर कंट्रोल करना पड़ा.
मैं उनकी जवानी को नशीली निगाहों से बाद देख रहा था. होंठों से हट कर मेरी नज़रें चाची की चूचियों पर आ गईं.
उनकी बड़ी बड़ी 36 इंच की चूचियां एक लयबद्ध तरीके से सांसों के साथ उठ बैठ रही थीं. मेरी नजरों के सामने चाची के गहरे गले के ब्लाउज में उनकी चूचियां बहुत ही मस्त लग रही थीं.
जब मुझसे रहा नहीं गया, तो मैंने ‘चाची चाची ..’ कह कर उन्हें आवाज दी.
मैंने चाची को आवाज़ देकर देखना चाहता था कि कहीं वो जाग तो नहीं रही हैं. जब मेरे आवाज़ देने पर भी चाची नहीं उठीं, तो मैं समझ गया कि चाची गहरी नींद में सो रही हैं.
अब मैंने हिम्मत करते हुए अपना एक हाथ उनकी चूची पर रख दिया और हल्के हाथ से चूची के साथ खेलने लगा.
शुरुआत में तो मुझे कुछ डर सा लगा फिर चाची की नर्म नर्म चुचियों को छुआ तो मुझे मजा आ गया.
मैं पहले एक चूची के साथ खेला, फिर दूसरी के साथ मजा लिया.
दो मिनट में ही मुझे बहुत मज़ा आने लगा.
अब मैं पूरी तरह जोश में आ गया था. कुछ पल के बाद मैं रुक गया और आहिस्ता से चाची का ब्लाउज खोलने लगा.
मैंने चाची के चिटकनी वाले बटन को खींचा, तो एक बटन चट से खुल गया और उनकी चूचियों की दरार जन्नत के दीदार होने लगे.
मैंने दूसरे बटन को झटका दिया, तो वो भी खुल गया. इसी तरह से मैंने उनके ब्लाउज को खोल दिया.
आह … चाची की दूधिया चूचियां मस्त लग रही थीं.
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