आंटी का मदमस्त जिस्म
आपको बता दूं कि मैं वहां एक प्राइवेट कंपनी में जॉब कर रहा था. एक दिन मैं कम्पनी से जल्दी रूम पर आ गया. आंटी के हस्बेंड सुरेश अंकल 3 दिन के लिए गांव जा रहे थे. अब उनसे मेरी अच्छी जान पहचान हो चुकी थी.
जाते हुए अंकल ने कहा- मैं गांव जा रहा हूं कुछ दिन के लिये, यहां पर तुम्हारी आंटी को तुम्हारे भरोसे छोड़कर जा रहा हूं. अगर इसको कुछ मदद की जरूरत हो तो तुम देख लेना.
मैं बोला- जी अंकल. आप चिंता न करें.
फिर आंटी ने भी कहा- तुम खाना भी यहीं पर खा लेना. मैं नीचे ही बना लूंगी. तुम्हें अलग से बनाने की जरूरत नहीं है.
मैं आंटी की ओर देखकर मुस्करा दिया.
फिर मैं भी अंकल को छोड़ने के लिए ऑटो स्टैंड तक चला गया. वहां पर विदा लेने से पहले अंकल ने कहा- तुम ऐसा करना, नीचे ही अपनी आंटी यहां सो जाना. वो अकेली रहेगी तो डरती रहेगी.
अंकल ने आंटी को भी फोन करके बोल दिया कि तीन दिन तक राज को नीचे ही सुला लेना.
मैं भी जानबूझकर नाटक करने लगा- छोड़िये न अंकल, क्यों परेशान कर रहे हैं उनको?
मगर अंदर ही अंदर मैं खुश हो रहा था.
उसके बाद मैंने उनको विदा किया.
आते टाइम मैंने हम दोनों के लिए सेक्स की गोली और एक बोतल पीने के लिए ले ली. रात को 8.30 बजे आंटी का फोन आया कि खाना तैयार है.
मैं नीचे आ गया. जब आंटी को देखा तो देखता ही रह गया. वो दुल्हन की तरह तैयार हो चुकी थी.
मैंने पूछा- क्या बात है आंटी … आज तो … कमाल लग रही हो.
वो बोली- हां, आज रात हम दोनों की सुहागरात होने वाली है.
मैंने हंसने लगा और सोचा आंटी शायद मजाक कर रही है.
मगर फिर बेड की ओर नजर गयी तो पूरा बेड गुलाब के फूलों से सजा हुआ था.
खुश होकर मैंने आंटी को गोद में उठा लिया.
वो बोली- इतनी भी क्या जल्दी है? अब तो सारी रात ही हमारी है.
फिर मैंने उनको नीचे उतार दिया और वो खाने का इंतजाम करने लगीं.
इतने में मैंने अपने बैग से दारू की बोतल बाहर निकाल ली और पैग बनाने की तैयारी करने लगा.
वो मेरे पास आ गयीं.
मैंने पैग बनाकर आंटी को दिया तो वो बोली- ये क्या है?
मैं बोला- बस कुछ मत पूछो, चुपचाप पी जाओ.
मैंने आंटी के पैग में वियाग्रा की गोली डाल दी थी. आंटी पूरा गिलास एक घूंट में खाली कर गयी और बुरा सा मुंह बना लिया.
फिर मैंने अपना पैग खाली कर दिया. मैंने भी वियाग्रा उसमें मिला ली थी.
कुछ देर के बाद आंटी पर गोली और शराब दोनों का ही सुरूर चढ़ने लगा. वो मुझे खींचकर बेड पर ले गयी. मुझे अपने ऊपर गिरा लिया और मेरे बालों में हाथ फिराते हुए बोली- राज, क्या तुम आज रात के लिए मेरे पति बनोगे? वन नाइट हस्बैंड?
मैं हंसने लगा और बोला- आंटी ज्यादा चढ़ गयी लगता है. मैं राज हूं.
वो बोली- हां जानती हूं. मेरे पति बन जाओ ना राज … प्लीज।
अब मैं भी थोड़ा गंभीर हो गया. दरअसल आंटी ने कभी मुझसे इस तरह की बात नहीं की थी.
उसने मेरे गाल पर चूम लिया और बोली- प्लीज … बन जाओ ना … एक रात के लिये.
मैंने कहा- ओके, जैसे आपकी मर्जी. मैं आज आपका पति सुरेश बनूंगा.
फिर वो सिन्दूर और मंगलसूत्र लाई. मैंने उसकी मांग भरी और मंगलसूत्र पहना दिया. वो मेरे पैर छूने लगी. मैंने उसे उठाकर गले लगा लिया और बिस्तर पर ले आया.
हमने एक हल्का पैग लिया और फिर उसको मैंने दोबारा से बेड पर लिटा लिया. उसकी साड़ी को कंधे से उतार दिया और नीचे गिरा दिया. उसके ब्लाउज में कैद उसकी चूचियां बहुत मस्त लग रही थीं. इससे पहले मैंने आंटी को ऐसे रूप में नहीं देखा था.
अब मैंने उनकी साड़ी को पेटीकोट से निकाल लिया. उसको बेड पर ही खड़ी कर लिया और घुमाते हुए उसकी सारी साड़ी खींच डाली. साड़ी उसके बदन से बिल्कुल अलग हो गयी.
फिर एक एक करके उसके गहने उतार दिये. अब वो केवल ब्लाउज और पेटीकोट में थी. मैंने आंटी को बेड पर लिटा लिया और उसके होंठों पर होंठों को रख दिया.
आंटी के मुंह से शराब की गंध आ रही थी जो मुझे और ज्यादा उकसा रही थी. मैं उसके होंठों को चूसने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगी. मैं आंटी के पेटीकोट के ऊपर से ही उसकी चूत को सहला रहा था.
वो भी मुझे अपनी बांहों लिये हुए अपनी टांगें खोलकर अपनी चूत को रगड़वा रही थी. बेड से आ रही गुलाबों की खुशबू दोनों को मदहोश कर रही थी. अब मैंने आंटी को पलटा दिया और उसका ब्लाउज खोलने लगा.
मैंने उसकी पीठ से ब्लाउज को हटा दिया. उसने नीचे से ब्रा भी नहीं डाली हुई थी. मैं उसकी गोरी चिकनी पीठ पर चुम्बन देने लगा. आंटी हल्के हल्के सिसकारियां लेने लगी. उसके चूतड़ों का ऊपरी हिस्सा पेटीकोट के नाड़े के ऊपर तक दिख रहा था.
उस वक्त उसकी गांड बहुत ही मस्त लग रही थी. पीठ को चूमने के बाद मैंने आंटी को सीधा किया और उसके चूचों को चूसने लगा. आज उसकी चूचियों से अलग ही खुशबू आ रही थी.
उसके बड़े बड़े निप्पल कुछ ज्यादा ही रसीले लग रहे थे. मैं जोर जोर से निप्पलों को काटने लगा और वो आह्ह … आह्ह … करते हुए मेरे सिर के बालों में हाथ फिराने लगी. मेरा दूसरा हाथ आंटी की चूत को रगड़े जा रहा था.
आंटी का हाथ अब मेरे ओअर पर आ गया था और वो मेरे लंड को जोर जोर से सहला रही थी. मैंने जोर से उसके निप्पल पर काटा तो आंटी ने मेरे लंड को जोर से भींच दिया और मेरी भी आह्ह … निकल गयी.
वो जोर जोर से मेरे लंड की मुट्ठ मारने लगी. अब मुझसे रुका न गया और मैंने लोअर को नीचे खींच दिया. आंटी ने मेरी चड्डी के ऊपर से मेरे खड़े लंड को पकड़ लिया और तेजी से सहलाने लगी.
अब मैंने अपनी अंडरवियर भी निकाल दी और आंटी की गर्दन पकड़ कर नीचे अपनी जांघों की ओर दबा दी. उसने मेरे लंड को मुंह में ले लिया और जोर से चूसने लगी.
मैं पीठ के बल पीछे गिर गया और आंटी के सिर को अपने लंड पर दबाते हुए आंख बंद करके लंड चुसवाने का मजा लेने लगा. वो मेरे लंड को पूरा गले तक लेने की कोशिश कर रही थी और मैं कहीं आनंद के आसमान में उड़ रहा था.
अपनो दोनों हाथों को मैंने मोड़कर अपनी गर्दन के पीछे कर लिया और आराम से टांगें फैलाकर लंड चुसवाने लगा. मेरी आंखें बंद थीं और मेरे मुंह से आनंद के सीत्कार फूट रहे थे.
आंटी मेरे लंड को बार बार जीभ लगाकर चूस रही थी. जब भी उसकी जीभ मेरे लंड के टोपे पर लगती थी तो मैं एकदम से सिसकार उठता था. वो मेरी गोटियों को भी साथ साथ सहला रही थी.
आज वो मेरे लंड की कुछ ज्यादा ही दीवानी लग रही थी. शायद गोली का असर पूरा चढ़ गया था. ऊपर से हम दोनों ने शराब भी पी रखी थी.
आंटी ने जी भरकर मेरे लंड को चूसा. जब उसकी चूत में खुजली उठी तो उसने लंड को मुंह से निकाल दिया.
वो ऊपर आकर मेरे होंठों को चूसने लगी. मैंने उसके पेटीकोट में हाथ दे दिया और उसकी पैंटी में घुसा दिया. चूत पर मेरा हाथ जा लगा. आंटी की चूत एकदम से चिपचिपा गयी थी. मैंने चूत में उंगली दे दी और अंदर बाहर करते हुए आंटी के होंठों को चूसता रहा.
कुछ ही देर में आंटी पागल हो गयी और मेरे कपड़े फाड़ने लगी. मैं समझ गया कि आंटी अब लंड के बिना नहीं रह सकती है. उसने मेरे कपड़ों को खींच कर मुझे पूरा नंगा कर दिया.
फिर मैंने उसे उठाकर बिस्तर पर लेटा दिया और उसका पेटीकोट और पैंटी एक साथ उतार दिया. अब वो मेरे सामने नंगी थी. मैं उसकी मखमली गुलाबी चूत को चाटने लगा.
उसकी चूत में जीभ देकर अंदर तक घुमाने लगा. आंटी मेरे सिर को पकड़ कर चूत में दबाने लगी. अपनी टांगों में उसने मेरे सिर को बहुत जोर से जकड़ लिया था. मेरा पूरा मुंह आंटी की चूत में धंसा हुआ था.
वो तेजी से अपनी गांड को ऊपर नीचे करते हुए अपनी चूत को चुसवा रही थी.
उसके मुंह से सिसकारियां निकल रही थीं- आह्ह … राज … मेरे राजा … खा ले मेरी चूत को … आह्ह … बहुत मजा देता है रे तू … मेरे पति … आह्ह मैं तेरी पत्नी … तेरी चुदाई की दीवानी … चोद दे … फाड़ दे।
आंटी ने ऐसे कहते हुए इतनी जोर से मेरे मुंह को अपनी चूत पर दबाया कि मेरी सांस ही रुक गयी. उसकी चूत से एक गर्म फव्वारा फूट पड़ा और मेरा मुंह उसकी चूत के रस से सराबोर हो गया.
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